bhai dooj 2022 भाई दूज पर्व और जानिए टीका लगाने का शुभ मुहूर्त

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bhai dooj 2022 भाई दूज पर्व और जानिए टीका लगाने का शुभ मुहूर्त

bhai dooj 2022 भाई दूज पर्व, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और स्नेह का प्रतीक है.

भारत में यह त्यौहार अपने अन्य नामो से भी जाना जाता है, जैसे भाई टीका, भैया दूज, यम द्वितीया, भारत द्वितीया आदि.

उत्तर भारत में इसे भाई दूज के नाम से, महाराष्ट्र और गुजरात में इसे भाऊ बीज और बंगाल में इसे भाई पोंटा के नाम से भी जाना जाता है.

भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाने वाला पर्व है.

यह तिथि दीपावली के दूसरे दिन आती है. इस मौके पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना करती है.

इस दिन विवाहित महिलाएं अपने भाइयों को घर पर आमंत्रित कर उन्‍हें तिलक लगाकर भोजन कराती हैं.

वहीं भाई शगुन के रूप में बहन को उपहार भेंट करता है. भाई दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन भी होता है.

मान्यता है कि इसी दिन यम देव अपनी बहन यमुना के बुलावे पर उनके घर भोजन करने आये थे.

  1. भैया दूज कब है?
  2. भाई दूज का तिलक मुहूर्त 2022
  3. भैया दूज पर क्‍या करें
  4. भाई दूज से जुड़ीं कुछ पौराणिक कथाएं

भैया दूज कब है

bhai dooj 2022 इस साल दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।

इसके बाद गोवर्धन पूजा और फिर 26 अक्टूबर 2022 को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।

बता दें कि इस साल गोवर्धन पूजा के दिन सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है।

इस साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 26 अक्टूबर को दोपहर से शुरू हो रही है जो 27 अक्टूबर की दोपहर को समाप्त हो रही है।

ऐसे में इस बार 26 और 27 दोनों ही दिन भाई दूज का पर्व मनाया जा रहा है। लेकिन 26 अक्टूबर को ज्यादा श्रेष्ठ माना जा रहा है।

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भाई दूज का तिलक मुहूर्त 2021

शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि प्रारंभ- 26 अक्टूबर दोपहर 2 बजकर 42 मिनट से

शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि समाप्त- 27 अक्टूबर 12 बजकर 45 मिनट तक

भाई दूज अपराह्न समय – 26 अक्टूबर दोपहर 01 बजकर 12 मिनट से 0 3 बजकर 27 मिनट तक

भैया दूज पर क्‍या करें

  • भैया दूज के दिन नहा-धोकर स्‍वच्‍छवस्‍त्र धारण करें. इस दिन बहनें नए कपड़े पहनती हैं. 
  • इसके बाद अक्षत (ध्‍यान रहे कि चावल खंड‍ित न हों), कुमकुम और रोली से आठ दल वाला कमल का फूल बनाएं. bhai dooj 2022
  • अब भाई की लंबी उम्र और कल्‍याण की कामना के साथ व्रत का संल्‍प लें. 
  • अब विधि-विधान के साथ यम की पूजा करें. 
  • यम की पूजा के बाद यमुना, चित्रगुप्‍त और यमदूतों की पूजा करें. 
  • अब भाई को तिलक लगाकर उनकी आरती उतारें.  
  • इस मौके पर भाई को यथाशक्ति अपनी बहन को उपहारा या भेंट देनी चाहिए.
  • पूजा होने तक भाई-बहन दोनों को ही व्रत करना होता है. 
  • पूजा संपन्‍न होने के बाद भाई-बहन साथ में मिलकर भोजन करें.

भाई दूज से जुड़ीं कुछ पौराणिक कथाएं

यम और यमि की कथा – यह कथा सूर्यदेव और छाया के पुत्र पुत्री यमराज तथा यमुना से संबंधित है.

यमुना अक्सर अपने भाई यमराज से स्नेहवश निवेदन करती कि वे उनके घर आकर भोजन ग्रहण करें.

परंतु यमराज व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल देते थे.

यमराज ने सोचा, ”मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं. मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता.

बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है.’ बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया.

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कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर भाई यमराज को खड़ा देखकर हर्ष-विभोर हो जाती हैं.

प्रसन्नचित्त होकर भाई का स्वागत सत्कार कर भोजन करवाती हैं.

बहन यमुना के प्रेम, समर्पण और स्नेह से प्रसन्न होकर यमदेव ने वर मांगने को कहा,

तब बहन यमुना ने भाई यमराज से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आएं तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका कर भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे.

यमराज ‘तथास्तु’ कहकर यमलोक चले गए.

तब से मान्यता है कि जो भाई आज के दिन पूरी श्रद्धा से बहन के आतिथ्य को स्वीकार करता है उसे और उसकी बहन को यमदेव का भय नहीं रहता है.

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भगवान श्री कृष्ण और सुभद्रा की कथा (bhai dooj 2022)

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भाई दूज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण नरकासुर राक्षस का वध कर द्वारिका लौटे थे.

इस दिन भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फल,फूल, मिठाई और अनेकों दीये जलाकर उनका स्वागत किया था.

सुभद्रा ने भगवान श्री कृष्ण के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की थी.

इस दिन से ही भाई दूज के मौके पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और बदले में भाई उन्हें उपहार देते हैं.

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