Karva Chauth 2018 : करवा चौथ की पूजा विधि, व्रत कथा और व्रत विधि जाने

Karva Chauth 2018 : करवा चौथ की पूजा विधि, व्रत कथा और व्रत विधि जाने

2018 में करवा चौथ (Karva Chauth 2018) व्रत अक्टूबर माह की 27 तारीख दिन शनिवार को पड़ रहा है। करवा चौथ व्रत भारत की सभी विवाहित महिलाओं के लिए बहुत ही होता है। करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्‍ण पक्ष की चतुर्थी के दिन पड़ता हैं। हर साल की तरह इस बार भी उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में विवाहित महिलाओं में अभी से उत्साह देखने के मिल रहा है। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं जब सुबह के समय मन्दिर जाती है तो वहां जाकर मन्दिर के पुजारी से पूछती हैं कि इस महीने में करवा चौथ कब है, तिथि क्या हैं और शुभ मुहूर्त क्या है इसके साथ ही करवा चौथ डेट के बारे में जानना चाहती हैं।

Karva Chauth 2018

Shubh Muhurat (करवा चौथ शुभ मुहूर्त) Karva Chauth 2018

लखनऊ के एक मन्दिर में रहने वाले पुजारी ने बताया है कि यहां सुबह के समय जो विवाहित महिलाएं दर्शन के लिए मन्दिर आतीं हैं और करवा चौथ के बारे विस्तार से जानकारी लेती हैं। इस पर पुजारी ने बताया है कि इस बार करवा चौथ 27 अक्टूबर दिन शनिवार को हैं। करवा चौथ व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 7.36 से 8.54 तक है इसकी अवधि केवल 20 मिनट ही बताई जा रही है और करवा चौथ डेट 27 अक्टूबर है।

Karwa/Karva Chauth Puja Vidhi (करवा चौथ पूजा विधि)

हिन्दू धर्म के अनुसार करवा चौथ (Karva Chauth 2018) का व्रत कुवांर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन सभी महिलाएं पुरे दिन निर्जला उपवास रखती है और शाम के समय की पूजा चंद्रमा के निकलने से पूर्व ही करती हैं। इसके साथ ही करवा माता का भी पूजन भी कर लेती हैं। इसके बाद रात में चांद को अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलती है। करवा चौथ व्रत सभी विवाहित महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु और अच्छे जीवन की कामना के लिए रखती हैं। ऐसा भी माना जाता है कि कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए करवा चौथ का व्रत रखती है।

उत्तर प्रदेश सहित पुरे भारत में इस करवा चौथ व्रत पर्व को बड़ी प्रसन्नता के साथ मनाया जाता है लेकन करवा चौथ का पर्व उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में बड़े ही उत्साह के साथ जोर-शोर से मनाया जाता है।

करवा चौथ व्रत विधि (Karva Chauth 2018) :-

1. सूर्योदय से पहले स्‍नान कर के व्रत रखने का संकल्‍प लें और सास दृारा भेजी गई सरगी खाएं। सरगी में , मिठाई, फल, सेंवई, पूड़ी और साज-श्रंगार का समान दिया जाता है। सरगी में प्‍याज और लहसुन से बना भोजन न खाएं।

2. सरगी करने के बाद करवा चौथ (Karva Chauth 2018) का निर्जल व्रत शुरु हो जाता है। मां पार्वती, महादेव शिव व गणेश जी का ध्‍यान पूरे दिन अपने मन में करती रहें।

Karva Chauth 2018

3. दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इस चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है जो कि बड़ी पुरानी परंपरा है।

4. आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलुआ बनाएं। पक्के पकवान बनाएं।

5. फिर पीली मिट्टी से मां गौरी और गणेश जी का स्‍वरूप बनाइये। मां गौरी की गोद में गणेश जी का स्‍वरूप बिठाइये। इन स्‍वरूपों की पूजा संध्‍याकाल के समय पूजा करने के काम आती है।

Karva Chauth 2018

6. माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर विराजें और उन्‍हें लाल रंग की चुनरी पहना कर अन्‍य सुहाग, श्रींगार सामग्री अर्पित करें। फिर उनके सामने जल से भरा कलश रखें।

7. वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। गेहूं और ढक्‍कन में शक्‍कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवे पर स्‍वास्तिक बनाएं।

Karva Chauth 2018

8. वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। गेहूं और ढक्‍कन में शक्‍कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवे पर स्‍वास्तिक बनाएं।8. गौरी गणेश के स्‍वरूपों की पूजा करें। इस मंत्र का जाप करें – ‘नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥’ ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही पूजा करती हैं। हर क्षेत्र के अनुसार पूजा करने का विधान और कथा अलग-अलग होता है। इसलिये कथा में काफी ज्‍यादा अंतर पाया गया है।

9. अब करवा चौथ (Karva Chauth 2018) की कथा कहनी या फिर सुननी चाहिये। कथा सुनने के बाद आपको अपने घर के सभी वरिष्‍ठ लोगों का चरण स्‍पर्श कर लेना चाहिये।

Karva Chauth 2018

10. रात्रि के समय छननी के प्रयोग से चंद्र दर्शन करें उसे अर्घ्य प्रदान करें। फिर पति के पैरों को छूते हुए उनका आर्शिवाद लें। फिर पति देव को प्रसाद दे कर भोजन करवाएं और बाद में खुद भी करें।