केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार का दिवाली तोहफा, LTC (छुट्टियों) के बदले मिलेगा कैश, जानिए LTC योजना

केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार का दिवाली तोहफा, LTC (छुट्टियों) के बदले मिलेगा कैश, जानिए LTC योजना

कोरोना वायरस महामारी (Corona virus Pandemic) की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ी मार के बीच अब मांग में इजाफा करने के लिए सरकार ने ऐलान किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने  अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को त्योहारों के मौके पर तोहफा दिया.

सरकार ने दो प्रस्तावों का ऐलान किया. पहला प्रस्ताव लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) कैश वाउचर स्कीम सरकारी कर्मचारी छुट्टियों के बदले वाउचर ले सकते हैं. और दूसरा स्पेशल फेस्टिवल एडवांस स्कीम है. सीतारमण ने कहा कि इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि सरकारी व संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के बचत में इजाफा हुआ है.

सरकार को उम्मीद है कि अगर सरकारी कर्मचारी छुट्टियों पर यात्रा के लिए निकलेंगे तो उससे मांग बढ़ाने में सहायता मिलेगी. आइए समझते हैं कि एलटीसी या छुट्टी के साथ यात्रा रियायत क्या है.

LTC कैश योजना क्या है

अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इस साल अपने कर्मचारियों को अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के एवज में नकद वाउचर देने की घोषणा की है. इन वाउचर का इस्तेमाल सिर्फ ऐसे गैर-खाद्य सामान खरीदने के लिए किया जा सकता है जिनपर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगता है.

वित्त मंत्री ने कहा कि कर्मचारी उन वाउचर का इस्तेमाल ऐसे उत्पाद खरीदने के लिए कर सकते हैं जिन पर जीएसटी की दर 12 फीसदी या इससे अधिक है. LTC कैश वाउचर स्कीम के तहत, सरकारी कर्मचारी छुट्टियों के लिए नकद राशि का विकल्प चुन सकते हैं.

इसके तहत मांग को प्रोत्साहन के लिए खर्च के लिए अग्रिम में राशि दी जाएगी और विशेष त्योहार अग्रिम योजना शुरू की जाएगी. बता दें कि प्रत्येक चार साल में सरकार अपने कर्मचारियों को उनकी पसंद के किसी गंतव्य की यात्रा के लिए एलटीसी देती है. इसके अलावा एक एलटीसी उन्हें उनके गृह राज्य की यात्रा के लिए दिया जाता है.

एलटीसी (LTC)

केंद्र सरकार का कोई भी कर्मचारी 4 साल में एक बार एलटीसी सुविधा का लाभ उठाते हुए पूरे भारत में पूरे परिवार के साथ कहीं भी यात्रा कर सकता है. जिस साल कोई कर्मचारी एलटीसी का उपयोग करता है, फिर 4 साल बाद ही उसे यह सुविधा मिल सकती है.

इसके तहत यात्रा के लिए कर्मचारी को निर्धारित यात्रा भत्ता लेने का हक है. यानि कर्मचारियों की श्रेणी के मुताबिक उसकी यात्रा के लिए ट्रेन-बस-हवाई जहाज-स्टीमर के किराये का भुगतान सरकार की ओर से की जाती है.

होमटाउन एलटीसी

यह एलटीसी सरकारी कर्मचारी को अपने नियुक्ति के स्थान से लेकर भारत में कहीं भी, जहां उसका होमटाउन है वहां जाने के लिए मिलती है. सरकारी कर्मचारी हर चार साल के ब्लॉक में दो बार इसका लाभ उठा सकते हैं. 

क्या है एलटीसी कैश वाउचर स्कीम प्रस्ताव

इस स्कीम के तहत वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि सरकारी कर्मचारी लीव इन कैशमेंट और तीन बार टिकट किराया का लाभ कैश के रूप में लेने का विकल्प चुन सकते हैं. साथ ही 12 फीसदी से ज्यादा जीएसटी देयता वाले उत्पाद खरीने का भी विकल्प मिलेगा.

लेकिन, इसका लाभ लेने के लिए उन्हें डिजिटल लेनदेन (Digital Transaction) के लिए जरिए भुगतान करना होगा और जीएसटी इनवॉइस (GST Invoice) भी दिखाना होगा.

10 हजार ब्याज रहित एडवांस का प्रस्ताव

स्पेशल फेस्टिव एडवांस स्कीम के तहत सरकारी कर्मचारियों को ब्याज रहित 10,000 रुपये प्रीपेड रुपे कार्ड के जरिए देने का भी प्रस्ताव है. इस रकम को 31 मार्च 2021 से पहले खर्च करना होगा. कर्मचारी इस एडवांस को 10 इंस्टॉलमेंट्स में पुर्न भुगतान कर सकते हैं.

LTC स्कीम में कैश लेने वालोंसरकारी कर्मचारियों को करना होगा ये काम

  • एलटीसी के बदले कर्मचारियों को नकद भुगतान दिया जा रहा है.
  • कर्मचारी की पात्रता के मुताबिक यात्रा भाडे़ का भुगतान किया जाएगा.
  • भाड़े का भुगतान पूरी तरह टैक्स फ्री होगा. 
  • इस योजना का फायदा उठाने वाले कर्मचारी को भाड़े का तीन गुना खर्च करना होगा. 
  • लीव एन कैशमेंट के लिए भुगतान के बराबर ही खर्च करना होगा. 
  • 31 मार्च 2021 से पहले खर्च करना होगा. 
  • कर्मचारियों को एक खास मद में पैसा खर्च करना होगा.
  • जिन सेवा वस्तु पर पर 12 परसेंट या उससे अधिक जीएसटी लगता हो, वहीं पैसा खर्च करना होगा. 
  • केवल जीएसटी रजिस्टर्ड वेंडर या व्यापारी से ही सेवाएं या वस्तुओं की खरीद करनी होगा.
  • सेवा या वस्तुओं का भुगतान भी डिजिटल तरीके से करना होगा. 
  • यात्रा भत्ता या अवकाश भत्ता का क्लेम करते समय जीएसटी की रसीद प्रस्तुत करनी होगी. 

सरकार कितना करेगी खर्च

एलटीसी के लिए सरकार 5,675 करोड़ रुपये खर्च करेगी. वहीं केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों तथा बैंकों को 1,900 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे. वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से 19,000 करोड़ रुपये की मांग पैदा होगी. यदि आधे राज्यों ने इस दिशा निर्देश का पालन किया तो 9,000 करोड़ रुपये की मांग और पैदा होगी.

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