Bhai Dooj 2026: कब है भाई दूज? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक भाई दूज भी माना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल में दो बार भाई दूज का पर्व मनाया जाता है , जो होली और दीपावली के बाद पड़ता है।
इस दिन बहनें भाई की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधती हैं। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाते हैं। इसे भ्रातृ द्वितीया नाम से भी जानते हैं। जानिए होली भाई दूज की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
- भैया दूज कब है?
- भाई दूज का तिलक मुहूर्त 2026
- भैया दूज पर क्या करें
- भाई दूज से जुड़ीं कुछ पौराणिक कथाएं
भैया दूज 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, भैया दूज का त्योहार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भैया दूज 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा।
द्वितीया तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय के आधार पर भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भाई को तिलक लगाना और उसके मंगलमय जीवन की प्रार्थना करना विशेष फलदायी माना जाता है।

भाई दूज का तिलक मुहूर्त 2026
भाई दूज 2026 तिलक का शुभ मुहूर्त
भाई दूज के दिन भाई के माथे पर तिलक लगाने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में तिलक करने से भाई के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और उसे लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
भाई दूज 2026 के तिलक का शुभ समय:
तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त: स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित करें।
भाई दूज की तिथि: 11 नवंबर 2026, बुधवार
द्वितीया तिथि प्रारंभ: स्थानीय पंचांग के अनुसार 10 नवंबर की रात
द्वितीया तिथि समाप्त: 11 नवंबर को
भैया दूज पर क्या करें
- भैया दूज के दिन नहा-धोकर स्वच्छवस्त्र धारण करें. इस दिन बहनें नए कपड़े पहनती हैं.
- इसके बाद अक्षत (ध्यान रहे कि चावल खंडित न हों), कुमकुम और रोली से आठ दल वाला कमल का फूल बनाएं. bhai dooj 2024
- अब भाई की लंबी उम्र और कल्याण की कामना के साथ व्रत का संल्प लें.
- अब विधि-विधान के साथ यम की पूजा करें.
- यम की पूजा के बाद यमुना, चित्रगुप्त और यमदूतों की पूजा करें.
- अब भाई को तिलक लगाकर उनकी आरती उतारें.
- इस मौके पर भाई को यथाशक्ति अपनी बहन को उपहारा या भेंट देनी चाहिए.
- पूजा होने तक भाई-बहन दोनों को ही व्रत करना होता है.
- पूजा संपन्न होने के बाद भाई-बहन साथ में मिलकर भोजन करें.
भाई दूज से जुड़ीं कुछ पौराणिक कथाएं
यम और यमि की कथा – यह कथा सूर्यदेव और छाया के पुत्र पुत्री यमराज तथा यमुना से संबंधित है.
यमुना अक्सर अपने भाई यमराज से स्नेहवश निवेदन करती कि वे उनके घर आकर भोजन ग्रहण करें.
परंतु यमराज व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल देते थे. यमराज ने सोचा, ”मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं. मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता.
बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है.’ बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया.
Bhai Dooj 2026
कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर भाई यमराज को खड़ा देखकर हर्ष-विभोर हो जाती हैं.
प्रसन्नचित्त होकर भाई का स्वागत सत्कार कर भोजन करवाती हैं.
बहन यमुना के प्रेम, समर्पण और स्नेह से प्रसन्न होकर यमदेव ने वर मांगने को कहा, तब बहन यमुना ने भाई यमराज से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आएं तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका कर भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे.
यमराज ‘तथास्तु’ कहकर यमलोक चले गए.
तब से मान्यता है कि जो भाई आज के दिन पूरी श्रद्धा से बहन के आतिथ्य को स्वीकार करता है उसे और उसकी बहन को यमदेव का भय नहीं रहता है.

भगवान श्री कृष्ण और सुभद्रा की कथा (Bhai Dooj 2026)
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भाई दूज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण नरकासुर राक्षस का वध कर द्वारिका लौटे थे.
इस दिन भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फल,फूल, मिठाई और अनेकों दीये जलाकर उनका स्वागत किया था.
सुभद्रा ने भगवान श्री कृष्ण के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की थी. इस दिन से ही भाई दूज के मौके पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और बदले में भाई उन्हें उपहार देते हैं.