गुग्गुल (Guggul) क्या है, और जानिए गुग्गुल के लाभकारी फायदे

गुग्गुल (Guggul) क्या है, और जानिए गुग्गुल के लाभकारी फायदे

गुग्गुल का नाम तो सभी जानते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी बूटियां मौजूद हैं, जिनसे बड़ी से बड़ी बीमारियों को दूर किया जा सकता है. इन्हीं में से एक जड़ी बूटी का नाम है गुग्गुल या ‘गुग्गल’. गुग्‍गुल एक वृक्ष है जिसमें से निकलने वाले गोंद को भी हम गुग्‍गुल ही कहते है ये एंटीऑक्सीडेंट,एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है.

आज इस लेख के माध्यम से जानेंगे गुग्गुल (Guggul) क्या है, और गुग्गुल के लाभकारी फायदे…..

गुग्‍गुल एक प्रकार की गोंद होती है जिसे कमिफोरा मुकुल गुग्गुल (commiphora mukul) पेड़ के तने को काटने से प्राप्‍त किया जाता है. जिसेसे एक गोंद जैसा पदार्थ निकलता है और ठंडा होने के बाद ठोस हो जाता है.

और यह कई रोगों को दूर करने में लाभकारी होता है. इसे अक्‍सर अन्‍य जड़ी बूटियों के साथ मिला कर उपयोग किया जाता है खासतौर इसका उपयोग गठिया (Arthritis), त्‍वचा रोग, तंत्रिका तंत्र की बीमारियों, मोटापा, पाचन समस्‍याओं, मुंह के संक्रमण, मासिक धर्म, मलेरिया.

कामेच्‍छा बढ़ाने, हृदय रोग, फ्रैक्‍चर, नपुंसकता और मुंहासे पेट की गैस, सूजन, दर्द, पथरी, बवासीर पुरानी खांसी, यौन शक्‍ति में बढौत्‍तरी, दमा, जोडों का दर्द, फेफड़े की सूजन आदि विभिन्‍न समस्‍याओं के उपचार में उपयोग किया जाता है.

 गुग्गुल (Guggul) क्या है

  • गुग्गुल के अन्य भाषाओं में नाम 
  • गुग्गुल का सेवन कैसे करें
  • गुग्गुल के फायदे
  • गुग्गुल के नुकसान

गुग्गुल (Guggul) क्या है

गुग्गुल एक तरह का चिपचिपा गम है जो गुग्गुल के पेड़ से प्राप्त किया जाता है. ये वृक्ष के पुराने होने पर उसके तने से तरल पदार्थ की तरह बहता रहता है. ये पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. कई हर्बल दवाइयों में दूसरी जड़ी बूटियों के साथ मिलाकर इसका उपयोग किया जाता है. गुग्गुल स्वाद में कड़वा और कसैला होता है.

यह गर्म प्रकृति का माना जाता है. गुग्गुल का पेड़ सिर्फ वर्षा ऋतु यानि बारिश के मौसम में ही वृद्धि करता है और इसी समय इसके पेड़ पर पत्‍ते आते हैं. बाकि, सर्दी और गर्मी के मौसम में इस पेड़ का विकास रूक जाता है. सामान्‍य तौर पर गुग्‍गुल का पेड 3 से 4 मीटर तक लंबा होता है.

इसके तने से सफेद रंग का दूध निकलता है जो स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी होता है. प्राकृतिक रूप से गुग्‍गुल भारत के कर्नाटक, राजस्‍थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में अधिक पाया जाता है. गुग्गुल गम आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और मोटापे को दूर करने के लिए लाभकारी होता है. गुग्गुल के फायदे इस आर्टिकल में दिए जा रहें हैं.

गुग्गुल के अन्य भाषाओं में नाम 

इसे हिंदी में गुग्‍गुल, संस्‍कृत में गुगुलु (Guggulu) और अंग्रेजी में भारतीय बेदेलियम वृक्ष (Indian Bdellium Tree) के नाम से जाना जाता है. गुगुल भारत की पारंपरिक हर्बल दवाओं में प्रमुख भूमिका निभाता है.

गुग्गुल का सेवन कैसे करें

यदि आपको इसके सभी गुणों का फायदा लेना है तो सुबह-सुबह एक गिलास पानी मे चुटकी भर गुग्गुल डालकर सेवन करना चाहिए.

गुग्गुल के फायदे

डायबिटीज में असरदारडायबिटीज का मरीजों के लिए गुग्गुल काफी फायदेमंद होता है. गुग्गुल इंसुलिन के प्रोडक्शन को सही करने का काम करता है. गुग्गुल ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है और पेनक्रियाज को प्रोटेक्ट करता है जिससे इंसुलिन का प्रोडक्शन सही होता है. डायबिटीज चूर्ण के मरीजों को एक चम्मच सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ इसे जरूर लेना चाहिए.

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में – गुग्गुल में रक्त को शुद्ध करने और इसे फिर से जीवंत करने का गुण होता है. इसलिए यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को दूर का सकता है. ये शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार और लिपिड स्तर को भी नियंत्रित कर सकता है. कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने के लिए एक प्राकृतिक उत्पाद है.

एसिडिटी को करे दूर – चम्मच गुग्गुल का चूर्ण एक कप पानी में मिलाकर रख दें. लगभग एक घंटे के बाद छान लें. खाने के बाद इस मिश्रण का सेवन करने से एसिडिटी खत्म हो जाती है.

जोड़ों के दर्द में आराम – शरीर में हड्डियों से जुड़ी किसी भी परेशानी के होने पर गुग्गुल का सेवन करना लाभदायक होता है. इसके चूर्ण को एक चम्मच सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लेने से सूजन, चोट के बाद होने वाले दर्द और टूटी हड्डियों को जोड़ने में मदद मिलती है.

सूजन को करे दूर – गुग्गुल में इन्फ्लेमेशन गुण मौजूद होता है. जो कि दर्द और सूजन में राहत देने में मदद करता है. इसके चूर्ण का सेवन करने से शरीर के तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाने में भी बहुत मदद करता है. इसके चूर्ण को एक चम्मच सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें.

छाले-घाव में असरदारमुंह के छाले होने पर गुग्गुल को मुंह में रखें या गर्म पानी में घोलकर दिन में 3 से 4 बार इससे कुल्ला व गरारे करने से मुंह के अन्दर के घाव, छाले व जलन ठीक हो जाते हैं.

गंजापन से मिल जाएगा छुटकारा – अगर आप गंजेपन से परेशान है तो गुग्गुल को सिरके में मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से सिर पर वहां लगाए जहां बाल नहीं हैं. इसे रोज लगाए जब तक बाल आने न शुरू हो जाएं.

यूट्रस से जुड़ी दिक्कत में आराम – यूट्रस से जुड़ें रोगों के लिए गुग्‍गुल बहुत फायदेमंद होता है. इसके लिए एक चम्मच गुग्गुल पाउडर को सुबह-शाम गुड़ के साथ लेना चाहिए. अगर रोग बहुत जटिल है तो 4 से 6 घंटे के अन्तर पर इसका सेवन करते रहना चाहिए.

पेट की बीमारी में फायदेमंद – अगर आपको कब्ज की शिकायत हो तो गुग्गुल का चूर्ण फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए लगभग 5 ग्राम गुग्गुल में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण को मिलाकर रात में हल्के गर्म पानी के साथ लें. इससे पुराने से पुराना कब्ज भी दूर हो जाएगा.

गुग्गुल के नुकसान

  1. गुग्गुल का अधिक मात्रा में सेवन करना यकृत के लिए हानिकारक हो सकता है.
  2. गुग्गुल का अधिक सेवन से कमजोरी, मूर्च्छा (बेहोशी , अंगों में ढ़ीलापन, मुंह की सूजन तथा दस्त अधिक आने की समस्यां उत्पन्न हो सकती है.
  3. मुंह में छाले , रक्तपित्त , आंखों में जलन, उष्ण वात, पित्त से होने वाला सिरदर्द और पैर का फूल जाना आदि रोगों की अवस्था में गुग्गुल गाय के दूध का घी के साथ सावधानी पूर्वक सेवन करना चाहिए नहीं तो इससे हानि हो सकती है.
  4. गुग्गुल का सेवन काल में देर रात तक जागना और दोपहर को सोना नहीं चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.
  5. खट्टे पदार्थ, अधिक भोजन, श्रम, धूप, मद्य और क्रोध आदि अवस्था में गुग्गुल का उपयोग करने से हानि हो सकती है.

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